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अवैध निर्माण को यह कहकर प्रोटेक्ट नहीं किया जा सकता कि यह कंपाउंडेबल उल्लंघन है: सुप्रीम कोर्ट ने तोड़फोड़ के खिलाफ याचिका खारिज की

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सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को अवैध निर्माण को गिराने के खिलाफ दायर याचिका यह कहते हुए खारिज कर दी कि उल्लंघन कंपाउंडेबल प्रकृति का है। चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया (सीजेआई) सूर्यकांत ने टिप्पणी की, “सोचिए, आप इस देश में हर किसी को क्या लाइसेंस देंगे कि मैं एक गैर-कानूनी काम करूंगा, यह कंपाउंडेबल है… वे यह कहते हुए अथॉरिटी को 30 साल तक कोर्ट में घसीटेंगे कि यह कंपाउंडेबल है। भगवान जाने क्या होगा! लोग पागल हैं, वे सड़कें भी बनाकर कब्जा कर लेंगे!”
सीजेआई कांत और जस्टिस जॉयमाल्य बागची की वेकेशन बेंच ने सीनियर एडवोकेट के परमेश्वर (याचिकाकर्ता के लिए) की बात सुनने के बाद मामला खारिज किया। सीनियर वकील ने अन्य बातों के अलावा यह तर्क दिया कि वादी (प्रतिवादी नंबर 1) ने 4 निर्माणों के खिलाफ प्रार्थना की, लेकिन कैंटोनमेंट प्लानर ने उनमें से केवल 1 को अवैध पाया। उन्होंने आगे इस बात पर जोर दिया कि अवैध निर्माण कंपाउंडेबल प्रकृति का है। सीजेआई ने परमेश्वर से यह दिखाने के लिए कहा कि अतिरिक्त कमरा (जिसे अवैध रूप से बनाया गया बताया गया था) उचित मंजूरी लेने के बाद बनाया गया।
इस पर सीनियर वकील ने जवाब दिया, “यह कंपाउंडेबल है।” सीजेआई ने फिर पलटवार किया, “पहले आप अवैध निर्माण करते हैं, फिर आप कहते हैं कि यह कंपाउंडेबल है! कोर्ट ऐसे व्यक्ति की मदद क्यों करे, जो कानून को धोखा दे रहा है? हमें इस तरह के तत्वों से बहुत सख्ती से निपटना चाहिए… उन्हें इसे गिरा देना चाहिए और आपसे गिराने का खर्च वसूलना चाहिए। अगर आप हमसे पूछें तो उन्हें कुछ जुर्माना भी लगाना चाहिए। यही वह अनुशासन है जिसे हमें समाज में [बढ़ावा] देना चाहिए”।
संक्षेप में मामला प्रतिवादी नंबर 1 (वादी) ने याचिकाकर्ता (प्रतिवादी) के खिलाफ एक मुकदमा दायर किया, जिसमें उसके घर के पास एक कमरे के निर्माण और छत के विस्तार को चुनौती दी गई। चूंकि प्रतिवादी नंबर 1 और उसकी पत्नी विदेश में रह रहे थे, इसलिए याचिकाकर्ता ने कथित तौर पर उनकी गैरमौजूदगी का फायदा उठाया और कैंटोनमेंट बोर्ड से अनुमति के बिना निर्माण कार्य किया, जिसने प्रतिवादी के घर के सामने खुली जगह पर अतिक्रमण कर लिया।
ट्रायल कोर्ट ने अधिकार क्षेत्र की कमी के आधार पर मुकदमा खारिज कर दिया। अपील में तेलंगाना हाईकोर्ट ने पाया कि निर्माण आवश्यक अनुमति प्राप्त किए बिना किए गए। इसमें यह साफ़ तौर पर साबित हुआ कि सूट शेड्यूल प्रॉपर्टी में प्रतिवादी नंबर 1 ने निर्माण किया और यह भी माना गया कि प्रतिवादी नंबर 1 ने इस निर्माण के लिए कैंटोनमेंट बोर्ड यानी प्रतिवादी नंबर 3 से कोई अनुमति नहीं ली। इसलिए यह निर्माण अवैध और अनाधिकृत है, यह नोट किया गया। आखिर में हाईकोर्ट ने आंशिक रूप से प्रतिवादी नंबर 1 के पक्ष में फैसला सुनाया और आदेश दिया कि अवैध निर्माण को 1 महीने के अंदर हटा दिया जाए। Case Title: AMITESH JEET SINGH Versus TGK MAHADEV AND ORS., SLP(C) No. 38224/2025

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