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NSA में बंद सांसद अमृतपाल सिंह की संसद सत्र में शामिल होने की मांग पर पंजाब सरकार से जवाब तलब

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पंजाब एंड हरियाणा हाइकोर्ट ने खडूर साहिब से सांसद अमृतपाल सिंह की याचिका पर पंजाब सरकार से जवाब मांगा। अमृतपाल सिंह इस समय कड़े राष्ट्रीय सुरक्षा कानून (NSA) के तहत असम की डिब्रूगढ़ सेंट्रल जेल में बंद हैं। उन्होंने संसद के मौजूदा बजट सत्र में शामिल होने के लिए अस्थायी रिहाई की मांग की। चीफ जस्टिस शील नागू और जस्टिस संजीव बेरी की खंडपीठ ने बुधवार को पंजाब सरकार को 10 दिन के भीतर अपना जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया।
संसद का बजट सत्र दो चरणों में आयोजित होना है, पहला चरण 28 जनवरी, 2026 से 13 फरवरी, 2026 तक और दूसरा चरण 9 मार्च, 2026 से 2 अप्रैल, 2026 तक। अमृतपाल सिंह ने इस पूरे अवधि के दौरान संसद में व्यक्तिगत रूप से उपस्थित रहने के लिए आवश्यक व्यवस्था किए जाने की मांग की। याचिका में अमृतपाल सिंह ने पंजाब सरकार के उस आदेश को चुनौती दी, जिसमें उनकी अस्थायी रिहाई या पैरोल की मांग खारिज किया गया। उन्होंने कहा कि सरकार ने उनकी अर्जी को अवैध, अस्पष्ट, अव्यवहारिक और अत्यंत संक्षिप्त आदेश के जरिए खारिज किया।
अमृतपाल सिंह की ओर से दलील दी गई कि वह अपने निर्वाचन क्षेत्र की जनता का प्रतिनिधित्व करना चाहते हैं और संसद के भीतर उनकी समस्याओं को उठाना उनका संवैधानिक दायित्व है। याचिका में कहा गया, “मैं अपने क्षेत्र के लोगों की आवाज संसद में उठाना चाहता हूं, जो लोकतंत्र की सच्ची भावना और भारत के संविधान के अनुरूप है।” सुनवाई के दौरान जब कोर्ट ने यह सवाल उठाया कि क्या अमृतपाल सिंह वर्चुअल माध्यम से संसद सत्र में भाग ले सकते हैं तो केंद्र सरकार की ओर से पेश एडिशनल सॉलिसिटर जनरल सत्य पाल जैन ने स्पष्ट किया कि लोकसभा के प्रक्रिया और कार्य संचालन के नियमों में किसी सांसद को वर्चुअल माध्यम से भाग लेने की कोई व्यवस्था नहीं है।
गौरतलब है कि इससे पहले अमृतपाल सिंह की एक अन्य याचिका का निपटारा करते हुए हाइकोर्ट ने कहा कि NSA की धारा 15 के तहत अस्थायी रिहाई देने का अधिकार उपयुक्त सरकार के पास होता है और इस मामले में यह अधिकार पंजाब सरकार के पास है। कोर्ट ने उस समय पंजाब के गृह सचिव को 17 जनवरी को दी गई अमृतपाल सिंह की अर्जी पर निर्णय लेने और तत्काल इसकी जानकारी देने का निर्देश दिया। इसके बाद पंजाब सरकार ने यह कहते हुए उनकी मांग खारिज कर दी थी कि उनकी रिहाई से राज्य की सुरक्षा और सार्वजनिक व्यवस्था को गंभीर खतरा और पूर्वाग्रह हो सकता है। अब हाइकोर्ट ने एक बार फिर इस मुद्दे पर पंजाब सरकार से जवाब तलब किया। यह मामला न केवल एक सांसद के अधिकारों से जुड़ा है बल्कि यह राष्ट्रीय सुरक्षा, लोकतांत्रिक प्रतिनिधित्व और संवैधानिक संतुलन जैसे अहम सवालों को भी सामने लाता है।

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