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UP Lokayut Act: हाईकोर्ट ने मुख्यमंत्री को छूट देने वाले प्रावधान पर नोटिस जारी किया, मौजूदा लोकायुक्त के खिलाफ याचिका खारिज

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इलाहाबाद हाईकोर्ट ने सोमवार को पूर्व आईपीएस अधिकारी अमिताभ ठाकुर द्वारा दायर रिट याचिका पर नोटिस जारी किया। इस याचिका में उत्तर प्रदेश लोकायुक्त और उप-लोकायुक्त अधिनियम, 1975 के कुछ प्रावधानों की संवैधानिकता को चुनौती दी गई है, जिसमें मुख्यमंत्री को कानून के दायरे से बाहर रखने वाला प्रावधान भी शामिल है। कोर्ट ने उनकी एक अन्य याचिका खारिज कर दी, जिसमें उन्होंने मौजूदा लोकायुक्त और उप-लोकायुक्तों के खिलाफ ‘अधिकार पृच्छा’ (Quo Warranto) रिट की मांग की थी।
जस्टिस संगीता चंद्र और जस्टिस बृज राज सिंह की खंडपीठ ने ठाकुर की पहली याचिका (Writ-C No.9022 of 2025) को सुनवाई योग्य मानते हुए एडवोकेट जनरल को नोटिस जारी किया और उन्हें नोटिस तामील होने के बाद मामले को सूचीबद्ध करने का निर्देश दिया। ठाकुर ने अपनी याचिका में अधिनियम की धारा 2(g) में दिए गए शब्द मुख्यमंत्री को असंवैधानिक घोषित करने की मांग की। उनका तर्क है कि यह प्रावधान मुख्यमंत्री को किसी भी आरोप और शिकायत से बचाने के लिए बेहद मनमाना, अनुचित, अर्थहीन और खतरनाक है।
याचिका में कहा गया कि यह प्रावधान मुख्यमंत्री को किसी भी प्रकार का लाभ उठाने या किसी अन्य व्यक्ति को अनुचित नुकसान पहुंचाने के लिए अपने पद का दुरुपयोग करने से बचाता है। इस प्रावधान के तहत मुख्यमंत्री को लोक सेवक की परिभाषा से बाहर रखा गया, जिस पर लोकायुक्त की जांच लागू होती है। ठाकुर ने अधिनियम की धारा 5 के परंतुक को भी चुनौती दी, जो लोकायुक्त या उप-लोकायुक्त को उनके कार्यकाल की समाप्ति के बाद भी तब तक पद पर बने रहने की अनुमति देता है, जब तक कि उनका उत्तराधिकारी कार्यभार ग्रहण नहीं कर लेता।
राज्य ने इस याचिका पर प्रारंभिक आपत्ति उठाते हुए सुप्रीम कोर्ट के मोहम्मद सईद सिद्दीकी बनाम उत्तर प्रदेश राज्य (2014) के फैसले का हवाला दिया, जिसमें लोकायुक्त के रूप में जस्टिस एन.के. मेहरोत्रा ​​का कार्यकाल बरकरार रखा गया। खंडपीठ ने स्पष्ट किया कि उस मामले में संशोधित प्रावधान की वैधता को चुनौती नहीं दी गई, जबकि वर्तमान मामले में याचिकाकर्ता ने सीधे तौर पर संशोधित धारा 5 की संवैधानिकता को चुनौती दी। इसलिए कोर्ट ने याचिका को सुनवाई योग्य पाया और इस पर नोटिस जारी किया।
दूसरी याचिका (Writ-C No.9055 of 2025) के संबंध में कोर्ट ने नोट किया कि ठाकुर ने जस्टिस संजय मिश्रा (लोकायुक्त) और उप-लोकायुक्त शंभू सिंह यादव और दिनेश कुमार सिंह को उनके पद खाली करने का निर्देश देने के लिए अधिकार पृच्छा की रिट मांगी थी। इस याचिका में दो महीने के भीतर एक नए लोकायुक्त की जल्द से जल्द नियुक्ति सुनिश्चित करने के लिए परमादेश की भी मांग की गई। इस याचिका को खारिज करते हुए कोर्ट ने कहा कि उत्तर प्रदेश लोकायुक्त और उप-लोकायुक्त (संशोधन) अधिनियम, 2024 (26 फरवरी 2024 से प्रभावी) ने मौजूदा लोकायुक्तों और उप-लोकायुक्तों का कार्यकाल पांच साल या सत्तर वर्ष की आयु तक सीमित कर दिया, जो भी पहले हो। हालांकि खंडपीठ ने यह पाया कि यह संशोधन भविष्य में लागू होगा और उन मौजूदा पदाधिकारियों पर लागू नहीं होगा जो पहले से ही पद पर हैं। कोर्ट ने आगे कहा कि याचिकाकर्ता के पास कोई मौजूदा कानूनी अधिकार नहीं है और प्रतिवादी पर कोई वैधानिक कर्तव्य नहीं है, जिसके लिए परमादेश जारी किया जा सके। नतीजतन रिट याचिका संख्या 9055/2025 को खारिज कर दिया गया।

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