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पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने महंगी गाड़ियों की खरीद में गड़बड़ी के आरोप लगाने वाले ‘RTI एक्टिविस्ट’ के आपराधिक रिकॉर्ड की जानकारी मांगी

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पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट ने RTI एक्टिविस्ट याचिकाकर्ता के आपराधिक पृष्ठभूमि का विवरण मांगा। इस व्यक्ति ने पंजाब सरकार द्वारा महंगी यूटिलिटी गाड़ियों की खरीद में वित्तीय गड़बड़ी के आरोप लगाए हैं। सुनवाई के दौरान पंजाब सरकार की ओर से एडवोकेट जनरल मनिंदरजीत सिंह बेदी ने दलील दी कि पब्लिक इंटरेस्ट लिटिगेशन रूल्स, 2010 के तहत जनहित याचिका दाखिल करने से पहले याचिकाकर्ता को अपने परिचय और पृष्ठभूमि का खुलासा करना जरूरी है और रजिस्ट्री को उनके रिकॉर्ड की जांच करने का अधिकार है।
चीफ जस्टिस शील नागू और जस्टिस संजीव बेरी की खंडपीठ ने कहा, “जनहित याचिका दायर करने वाले व्यक्ति द्वारा अपने आपराधिक पृष्ठभूमि से संबंधित बयान देना जरूरी है। पंजाब राज्य ने आपत्ति जताई है कि याचिकाकर्ता के खिलाफ दो FIR दर्ज हैं, जिनका विवरण याचिका में नहीं दिया गया।” अदालत ने याचिकाकर्ता से नया हलफनामा दाखिल करने को कहा और निर्देश दिया कि जब याचिकाकर्ता अपनी आपराधिक पृष्ठभूमि का विवरण दे तो रजिस्ट्री उसे सत्यापित करे। उसके बाद ही मामला पीठ के समक्ष लाया जाए।
सतनाम सिंह धवन ने यह जनहित याचिका दायर कर CBI जांच की मांग की। उन्होंने आरोप लगाया कि पंजाब सरकार ने 144 टोयोटा हाइलक्स गाड़ियां खरीदने में सरकारी धन का दुरुपयोग किया और अवैध तरीकों से फंड जुटाए, जिससे संबंधित अधिकारी को व्यक्तिगत लाभ पहुंचाया गया। धवन का कहना है कि सरकार ने गाड़ियां निर्माता से सीधे जिस मूल्य पर खरीदीं, उससे प्रत्येक वाहन पर सरकारी खजाने को लगभग 10,72,441 का अतिरिक्त खर्च उठाना पड़ा। इस तरह 144 वाहनों की खरीद पर कम से कम 15.44 करोड़ का अतिरिक्त बोझ पड़ा, भले ही बल्क डिस्काउंट न मिला हो। हालांकि पंजाब के एडवोकेट जनरल ने अदालत को बताया कि याचिकाकर्ता के खिलाफ दो FIR लंबित हैं जिनमें गंभीर आरोप जैसे रंगदारी और जालसाजी शामिल हैं। ऐसे में जब तक उनकी पृष्ठभूमि का खुलासा नहीं होता, यह जनहित याचिका स्वीकार्य नहीं है। मामले की अगली सुनवाई अब 27 अगस्त को होगी।

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